Wednesday, 22 July 2015

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव : स्लम बस्तियों में बांग्लादेशियों का बसेरा

विवेकानंद चौधरी
नई दिल्ली। राजधानी में हाल के वर्षों में बांग्लादेशियों की संख्या में इजाफा होना दिल्ली ही नहीं देश की सुरक्षा और अस्मिता के लिए शुभ-संकेत नहीं है। इनका अवैध तरीके से यहां आकर बस जाना अनवरत जारी है। इसमें निकट भविष्य में ठहराव आएगा, ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसी बात नहीं कि स्थानीय प्रशासन और सरकार इस समस्या से अनजान हैं। बावजूद बांग्लादेशी घुसपैठियों पर अंकुश लगाने के लिए कारगर ऐक्शन नहीं लेना इन्हें कटघरे में खड़ा करता है।
वैसे तो दिल्ली के तकरीबन हर इलाकों में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी मिल जाएंगे, लेकिन इनकी बहुतायत स्लम बस्तियों में है, जहां यह एकजुट होकर रहते हैं। सूत्र की मानें, तो पचास से सौ बांग्लादेशी अवैध तरीके से रोजाना दिल्ली में पनाह ले रहे हैं। दिल्ली में रहने वाला कोई घुसपैठिया जब बांग्लादेश से लौटता है, तो इसके साथ आठ-दस बांग्लादेशी दिल्ली में बसेरा डालने आ पहुंचते है। सूत्र के अनुसार इन्हें सीमा पार करने में कोई खास परेशानी नहीं होती। इसकी दो प्रमुख वजह हैं। पहली, यह सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को किसी तरह आंखों में धूल झोंककर भारत की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। और दूसरी, सीमा पार कराने वाले माफियाओं का बांग्लादेश और भारत दोनों देशों की सीमा पर मकड़जाल फैला है। इनकी सेटिंग सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों से होती है। यह माफिया पैसे लेकर सीमा पार करा देते हैं। दिल्ली में रहने वाले कुछ बांग्लादेशियों ने राष्टÑीय उजाला के संवाददाता को बताया कि यह सीमा पार करते समय कभी पकड़ लिए जाते हैं, तो मात्र हजार से पंद्रह सौ रुपये देने पर सीमा पर तैनात जवान ही इन्हें सीमा पार करने में मदद कर देता है। यह बात दिल्ली पुलिस के कुछ ऐसे अधिकारियों को भी पता है, जिन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठिये पकड़े हैं। इन्होंने नाम न छापने की शर्त पर संवाददाता को बताया कि पकड़ गए घुसपैठियों ने पूछताछ में बताया कि वह सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों का पैसा देकर भारत की सीमा में प्रवेश करने में कामयाब हुए थे। इन पुलिस अधिकारियों ने यह बात अपने आला अधिकारियों को मौखिक रूप से जरूर बताई थी, लेकिन ऐसे संवेदनशील मामले पर जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
दिल्ली क ी स्लम बस्तियों में नरेला, बवाना, टीकरी खुर्द, होलम्बी कलां आदि प्रमुख नाम है, जहां बांग्लादेशी बेखौफ रह रहे हैं। इन्हें खानापूर्ति के लिये जरूर पकड़ा जाता है। लेकिन कभी यह पैसे देकर छुट जाते हैं, तो कभी सीमा पर छोड़ने के बाद पुन: दिल्ली आने में कामयाब हो जाते हैं। हालात यह है कि बांग्लादेशी दिल्ली के अलावा निकटवर्ती राज्यों को भी अपना पनाहगार बना रहे हैं। हरियाणा के सोनीपत, मेवात, फरीदाबाद, गुड़गांव में यह अच्छी संख्या में हैं। वहीं उत्तरप्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और अलीगढ में इन घुसपैठियों की संख्या चिंता की विषय है। सवाल उठता है कि इस मामले में सरकार मौन क्यों है। कहीं यह वोट की राजनीति तो नहीं है। शायद इस बात में दम है। ऐसा नहीं होता, तो सरकार इस मसले पर जरूर गंभीर होती और बांग्लादेशियों की संख्या में लगातार इजाफा नहीं होता।

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