Friday, 31 July 2015

लीबिया में ISIS ने चार भारतीयों को किया अगवा, अब तक नहीं मांगी कोई फिरौती

नई दिल्ली। त्रिपोली और ट्यूनिस से भारत लौट रहे चार भारतीय अध्यापकों का कथित रूप से इस्लामिक स्टेट आतंकवादी समूह (आईएस) ने लीबिया में अपहरण कर लिया है। सरकार ने आज बताया कि इनमें से दो अध्यापक हैदराबाद के हैं, एक अध्यापक रायचूर और एक बंगलुरु का है। चारों भारतीयों को सिर्त से करीब 50 किलोमीटर दूर एक जांच चौकी पर रोक लिया गया। यह इलाका आतंकवादी संगठन के नियंत्रण में है।
एमईए के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा कि इनमें से तीन यूनिवर्सिटी ऑफ सिर्त में फैकल्टी सदस्य हैं और एक अध्यापक जुफरा में सिर्त यूनिवर्सिटी की शाखा में काम करता है। उन्होंने कहा कि हम अध्यापकों के परिवारों के संपर्क में लगातार बने हुए हैं और चारों भारतीयों को जल्द छुड़ाने और उनकी सलामती सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे है।
स्वरुप ने कहा कि त्रिपोली में हमारे मिशन को दो दिन पहले, 29 जुलाई को शाम करीब 11 बजे पता चला कि त्रिपोली और ट्यूनिस के जरिए भारत लौट रहे चार भारतीयों का सिर्त से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर एक जांच चौकी पर अपहरण किया गया। इनमें से दो भारतीय हैदराबाद के रहने वाले हैं, जबकि एक भारतीय रायचूर और एक भारतीय बंगलूरु का है। तीन भारतीय सिर्त यूनिवर्सिटी में फैकल्टी के सदस्य थे और एक जुफरा में सिर्त यूनिवर्सिटी की शाखा में काम करते थे।
उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय त्रिपोली में अपने मिशन के प्रमुख के जरिए मामले संबंधी विस्तृत जानकारी का पता लगा रहा है। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चारों भारतीयों को सिर्त शहर में वापस लाया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब तक फिरौती की कोई मांग नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जिस जगह से भारतीयों का अपहरण किया गया है, वह इलाका इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण में है। इस आतंकवादी संगठन ने इराक और सीरिया में कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है।
भारत सरकार ने संघर्ष प्रभावित लीबिया में चिंताजनक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पिछले वर्ष जुलाई में एक परामर्श जारी करके अपने नागरिकों को लीबिया छोड़ने की सलाह दी थी। यह घटना ऐसे समय हुई है जब इराक में 39 भारतीय लापता है। उन्हें सुन्नी आतंकवादियों और सरकारी बलों के बीच संघर्ष के चरम के दौरान पिछले वर्ष बंधक बनाया गया था और उन्हें रिहा कराने के प्रयासों का अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है।

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