Monday, 10 August 2015

जेटली की चेतावनी, हिसाब से नहीं खर्च किया तो होंगे यूनान जैसे हालात

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से अधिक से अधिक बचत करने की आदत डालने की अपील की है। जेटली ने यूनानी अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि अगर बचत पर गंभीरतापूर्वक ध्यान नहीं दिया गया तो भारत में भी यूनान जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। पहले भारतीय लागत लेखा सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि यूनान में हाल ही में जो कुछ हुआ वह दरअसल इस बात का सीधा परिणाम था कि सरकारों ने अपने साधनों के दायरे में ‘न रहने का’ फैसला किया था।
 केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजकोषीय समेकन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सरकारों के कुशल व्यय प्रबंधन में नाकाम रहने पर यूनान जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। जेटली ने कहा कि राजकोष, सरकार का धन आखिरकार जनता का धन है और यह धन पावन है। पावन इस वजह से है कि सरकारों को अपने साधनों के दायरे में रहने का अनुशासन सीखना होगा।
राजकोषीय समेकन की जरूरत पर जोर देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सरकारों के कुशल व्यय प्रबंधन में नाकाम रहने पर यूनान जैसी स्थिति पैदा हों सकती है। वित्त मंत्री ने कहा कि एक-दूसरे से जुड़ी इस दुनिया में यदि सरकारें अपने साधनों के दायरे में नहीं रह सकीं तो इसके बहुत सारे प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं। मंत्री ने कहा कि राजकोषीय अनुशासन पर कायम रहने और राजकोषीय समेकन का पालन करने का एक ही रास्ता है कि  या तो आप ज्यादा कमाएं या कम खर्च करें।

Saturday, 8 August 2015

‘डिग्री दिखाओ पीएम साहब’, ट्विटर पर नरेंद्र मोदी से हो रहा ये सवाल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार खुद सोशल मीडिया पर अपने विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के बाद अब पीएम नरेंद्र मोदी से भी डिग्री दिखाने की मांग हो रही है। हालांकि, न उन पर कोई आरोप लगा है और न ही कोई शिकायत हुई है। ट्विटर पर यूजर्स उनकी डिग्री मांग रहे हैं।
#DegreeDikhaoPMSaab ट्विटर में टॉप पर ट्रैंड कर रहा है। इस हैशटैग के माध्यम से यूर्जस उन पर तंज कस रहे हैं और उनकी मजाकिया तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। जबकि कुछ यूजर्स देश के पीएम के लिए इस तरह के हैशटैग का प्रयोग करने पर लोगों को खरी-खोटी भी सुना रहे है।
दरअसल, वेब आर्काइव में मौजूद पीएम मोदी के एक पुराने प्रोफाइल में बताया गया है कि उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी से एमए पास किया है और पीएम मोदी की नई साइट पर शैक्षणिक योग्यता का जिक्र ही नहीं है। हालांकि, लोकसभा की साइट पर पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता के रूप में अभी भी एमए होने का जिक्र है। ट्विटर पर कुछ लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि पीएमओ ने पीएम की डिग्री की जानकारी मांगने वाली आरटीआई को खारिज कर दिया है। हालांकि, इसके बाद से इस हैशटैग के बहाने कुछ लोगों को पीएम पर व्यंग्य बाण छोड़ने का मौका मिला है, तो कुछ इस ट्रेंड में राहुल गांधी समेत कई अन्य नेताओं को भी लपेट रहे हैं।
आखिर फिर क्यों हो रहा सवाल?
2014 लोकसभा चुनाव के दौरान फाइल किए गए प्रधानमंत्री के ऐफिडेविट में भी उनकी शैक्षणिक योग्यता गुजरात यूनिवर्सिटी से एमए ही दर्शाई गई है। इतना ही नहीं, लोकसभा की साइट पर भी पीएम की शैक्षणिक योग्यता एमए ही बताई गई है। अब सवाल है कि वो कौन लोग हैं जो नरेंद्र मोदी से ये सवाल कर रहे हैं।

‘राष्ट्रीय उजाला’ विशेषः फांसी के मसले पर मधेपुरा सांसद को याद आए गांधीजी

-आतंकियों को मिले सजा, न हो फांसी : सांसद
प्रियंका तिवारी
नई दिल्ली। वर्ष 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी और फांसी पर चढ़ा दिए गए याकूब मेनन की फांसी के बाद देश में इस बात पर चर्चा होने लगी है कि फांसी पर और जल्दबाजी होनी चाहिए, आतंकियों के प्रति और क्रूर व्यवहार होना चाहिए या उन्हें सजा तक ही सीमित कर देना चाहिए। इसी बीच बिहार के मधेपुरा से सांसद और जन अधिकार पार्टी के सरंक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राष्ट्रीय उजाला से हुई खास बातचीत में कहा कि गांधीजी ने जेल को यातना गृह कहा था। श्री यादव ने कहा कि मानवीय दृष्टि से फांसी गलत है और देश की आवाम भी चाहती है कि फांसी न हो। यह पूछने पर कि क्या आतंकियों के प्रति फांसी को और क्रूर किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि किसी को सजा जरूर मिले, क्योंकि उसने अपराध किया है, लेकिन फांसी न हो। बता दें इसके पहले याकूब की फांसी के ठीक बाद पप्पू यादव ने कहा था एक महापुरुष (डॉ. कलाम) के अंतिम संस्कार के दिन आतंकी याकूब मेमन को फांसी नहीं देना चाहिए था। इसे एक दिन आगे बढ़ा देना चाहिए था। लेकिन अब पप्पू यादव ने एक आतंकी को मिली फांसी पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

मुगलों तक को पता था कि गोवध का समर्थन किया तो शासन नहीं कर सकते : राजनाथ

नयी दिल्ली। गोरक्षा पर जोर देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि मुगलों तक को पता था कि यदि उन्हें शासन करना है तो ‘गोवध को खुला समर्थन’ व्यावहारिक नहीं होगा जबकि ब्रिटिश लोग इस पहलू को समझने में विफल रहे।वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि गृह मंत्री के रूप में उन्होंने सुनिश्चित किया है कि बांग्लादेश को होने वाली मवेशियों की तस्करी रूके । सीमा सुरक्षा बल :बीएसएफ: के जवानों ने इसके लिए लगातार प्रयास किये । राजनाथ ने कहा, ‘‘मेरे पास मुगल शासकों के बारे में जो भी अल्प जानकारी है .. मैं कह सकता हूं कि मुगल शासकों को ये बात पता थी । वो समझते थे कि गोवध कर और गोवध को खुला समर्थन कर, वे लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि बाबर ने भी अपनी वसीयत में लिखा कि हम एक बार में दो चीजें नहीं कर सकते । या तो जनता के दिलों पर राज करो या गोमांस खाओ । केवल एक बात हो सकती है .. साथ साथ ये दोनों काम नहीं हो सकते ।’’ वह राष्ट्रीय गोधन महासंघ द्वारा कृषि मंत्रालय के सहयोग से आयोजित गोरक्षा पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे ।
राजनाथ सिंह ने कहा, ‘‘जब ब्रिटिश भारत आये, भारतीय परंपरा का जिस तरह आदर होना चाहिए था .. वैसा नहीं हुआ । वस्तुत: ये और खराब हो गयी । आजादी की पहली लडाई :1857: की वजहों में से एक मुख्य वजह गाय की चर्बी थी, जो कारतूस में इस्तेमाल होती थी । इससे गाय के प्रति जनता की आस्था का पता चलता है ।’’

प्रदर्शनों के बाद ओड़िशा में विवादित ‘साधु’ सारथी बाबा गिरफ्तार

एक टीवी चैनल ने स्वयंभू ‘साधु’ पर हैदराबाद के एक होटल में एक महिला के साथ दो दिन बिताने का आरोप लगाते हुए उसकी कुछ तस्वीर दिखायीं थीं। महिला कथित तौर पर उसकी पत्नी बनकर उसके साथ रही थी। हालांकि सारथी ने आरोप से इनकार करते हुए टीवी चैनल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। अपराध शाखा की टीम ने कल आश्रम में सारथी से पूछताछ की और परिसर में गहन तलाशी ली। पुलिस ने कहा कि वहां से कुछ दस्तावेज, नकदी, चांदी, सोना और दूसरी चीजें बरामद हुईं। उन्होंने कहा कि अपराध शाखा के अधिकारियों ने कुछ बैंक खाते, तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज भी हासिल किए जिनकी जांच की जा रही है।

नीतीश की सभा में हंगामा, बिहार में मोदी के पोस्टर पर फिर सियासत

पटना/नई दिल्ली। बिहार का सियासी माहौल फिर गरमाने लगा है। दिल्ली के श्रीराम सेंटर में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम में उस वक्त हंगामा हो गया, जब कुछ लोगों ने पर्चे दिखाए। हालांकि, जल्द ही इन लोगों पर काबू पा लिया गया। दूसरी तरफ, रविवार को गया मेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली से पहले पोस्टर वॉर शुरू हो गया है।
गया के जिस गांधी मैदान में यह रैली होनी है, शुक्रवार रात उसके आसपास लगे पोस्टरों को फाड़ डाला गया। कुछ पोस्टरों में से मोदी का चेहरा ही काट दिया गया। वहीं, गया में अलग-अलग जगहों पर दीवारों पर जेडीयू के मैसेज लिखी पेन्टिंग्स पर काला रंग पोत दिया गया। इन पेन्टिंग्स पर मोदी की परिवर्तन रैली के पोस्टर चिपकाए गए हैं। बीजेपी अौर जेडीयू एक-दूसरे को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है। बता दें कि मोदी की मुजफ्फरनगर में होने वाली रैली से पहले पटना में भी इस तरह का पोस्टर वॉर दिखा था। मोदी के होर्डिंग्स और पोस्टरों के ऊपर नीतीश कुमार के पोस्टर लगाए गए थे।
 बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने कहा, ”जेडीयू के कार्यकर्ता गुण्डागर्दी पर उतर आए हैं। पीएम के पोस्टर फाड़े जा रहे हैं। प्रशासन मूकदर्शक बनकर देख रहा है। जब प्रधानमंत्री की रैली होनी है तो गांधी मैदान में जेडीयू को अपने पोस्टर लगाने की क्या जरूरत है? नीतीश कुमार प्रशासन की आड़ में ओछी राजनीति कर रहे हैं। प्रशासन उनके कार्यकर्ताओं को नहीं रोक रहा है। अगर प्रशासन इनपर रोक नहीं लगाता है तो बीजेपी खुद कार्रवाई करेगी।”

Thursday, 6 August 2015

डॉ. कलाम का सोशल नेटवर्किंग साइट्स संभालेगा कौन, इसे लेकर विवाद

चेन्नई/नई दिल्ली : भूतपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की मौत के एक हफ्ते बाद ही उनके कुछ सहयोगियों के बीच जंग छिड़ गई है। इस जंग की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डॉ. कलाम के ऑफिशियल अकाउंट्स पर किसका कंट्रोल हो? ध्यान रहे कि एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के बाद इस बात की घोषणा की गई थी कि सोशल मीडिया पर उनके अकाउंट्स को बंद नहीं किया जाएगा और उसका संचालन उनकी विरासत के रूप में होगा। लेकिन अब जंग इस बात पर छिड़ चुकी है कि आखिर इसका संचालन कौन करे, उनके स्टूडेंट या उनका आधिकारिक दफ्तर?
दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति के नई दिल्ली स्थित कार्यालय से बुधवार को जारी एक बयान में साफ-साफ कहा गया है कि कलाम साहब के साथ एकेडमिक व निजी तौर पर जुड़े रहे सृजन पाल सिंह को मीडिया में और दूसरे सोशल प्लेटफॉर्म पर मिसाइल मैन के बारे में कोई बयान नहीं देना चाहिए।
इस बयान में यह भी कहा गया है कि सृजन पाल सिंह को पहले ही सलाह दी गयी है कि वह पूर्व राष्ट्रपति से व उनकी स्मृति में बनाये गए सभी फेसबुक व ट्विटर अकाउंट को फौरन निष्क्रिय कर दें। दूसरी तरफ सृजन पाल सिंह ने एक अंग्रेजी अखबार से कहा है कि डॉ. कलाम ने हमसे सिर्फ अपने निजी अनुभव ही साझा किये हैं। जब वे जीवित थे, तब उन्होंने मुझे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने अकाउंट्स को अपडेट करने की जिम्मेवारी सौंपी थी।
ध्यान रहे कि सृजन पाल सिंह का डॉ. कलाम के साथ ‘आखिरी आठ घंटे’ शीर्षक वाला मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उधर, कलाम के साथ दो दशकों तक वैज्ञानिक सलाहकार के तौर पर जुड़े रहे वी. पोनराज ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति के कार्यालय को इस बात से एतराज नहीं है कि एक छात्र के रूप में सृजन पाल सिंह कलाम के साथ अपने अनुभवों को साझा करें, लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनके अकाउंट्स की देखरेख के लिए पूर्व राष्ट्रपति का दफ्तर है।