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Tuesday, 21 July 2015

‘राष्ट्रीय उजाला’ एक्सक्लूसिव : विवेकानंद फाउंडेशन दे रहा है मोदी को अधिकारी

-मोदी सरकार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसी विचारधारा पर आधारित थिंक टैंक विवेकानंद फाउंडेशन के सामरिक व रणनीतिक मामलों पर इनपुट-
-सूची में बीएसएफ के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह, पूर्व शहरी विकास सचिव अनिल बैजल, रक्षा शोध और विकास संगठन के पूर्व महानिदेशक वीके सारस्वत, अनुसंधान और विश्लेषण विंग के पूर्व प्रमुख सीडी सहाय, रूस में भारत के राजदूत रहे प्रभात शुक्ला, पूर्व वायुसेना प्रमुख एसजी ईमानदार भी-
विभूति
नई दिल्ली। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा, पीके मिश्रा और अजीत मिश्रा मोदी सरकार बनने के तुरंत बाद ही केंद्र सरकार का अहम हिस्सा बन गए थे। नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाए गए थे। पीके मिश्रा एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर जुड़े थे। अजीत डोभाल को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैसे अहम पद पर बैठाया गया। यह तीनों अधिकारी रिटायरमेंट के बाद विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन से जुड़े थे। विवेकानंद फाउंडेशन आरएसएस आधारित विचारों का एक केंद्र है। संघ की विचाराधारा से जुड़े रहने वाले दर्जनों नौकरशाह रिटायरमेंट के बाद विवेकानंद फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। अब इनके बाद प्रकाश सिंह और अनिल बैजल के लिए मोदी सरकार में जगह तलाशी जा रही है। डोभाल के संस्था से हटने के बाद एनसी विज को वहां का निदेशक बनाया गया।
इस फाउंडेशन की खासियत यह है कि पूर्व नौकरशाह, पूर्व सैन्य अधिकारियों के अलावा ज्यादातर लोग यहां श्रम के रूप में दान करते हैं और इसके बदले कोई तनख्वाह नहीं लेते हैं।
दरअसल, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित एक ऐसा नियुक्ति केंद्र बन गया है, जहां मोदी सरकार के मनपसंद लोगों की पूरी टीम पहले से ही तैयार थी। धीरे-धीरे उन्हें सरकार में लगाया जा रहा है।
नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद भरोसे का अधिकारी माना गया। उन्हें अहम जिम्मेदारी देते हुए पीएमओ में प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया गया है। पीके मिश्रा को मोदी ने अपना एडिशनल सेक्रेटरी बनाया है। नृपेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव भी रहे थे। उनके बारे में कहा जाता था कि मोदी के पसंद तो थे ही, साथ ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह के भी पसंद के हैं।
अंदर की बात यह है कि बीएसएफ के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह, पूर्व शहरी विकास सचिव अनिल बैजल, रक्षा शोध और विकास संगठन के पूर्व महानिदेशक वीके सारस्वत, अनुसंधान और विश्लेषण विंग के पूर्व प्रमुख सीडी सहाय, रूस में भारत के राजदूत रहे प्रभात शुक्ला, पूर्व वायुसेना प्रमुख एसजी ईमानदार की सूची तैयार है।
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के सलाहकार बोर्ड में एक से बढ़कर एक दिग्गज हैं। बोर्ड में पूर्व सेना प्रमुख वीएन शर्मा, रॉ के पूर्व प्रमुख एके वर्मा, पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एस कृष्णास्वामी, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, थिंकर एस गुरुमूर्ति, भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के प्रोफेसर आर वैद्यनाथ, पूर्व सेना प्रमुख शंकर रॉय, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व कैबिनेट सचिव प्रभात कुमार, जम्मू-कश्मीर के पूर्व गवर्नर एसके सिन्हा शामिल हैं।
विवेकानंद फाउंडेशन पर मोदी की नजर अनायास नहीं है। फाउंडेशन यूपीए सरकार की नाक में दम करने वाली गतिविधियों का केंद्र रहा है। परदे के पीछे तमाम योजनाएं इसी केंद्र में बनीं। जब सत्ताधारी कांग्रेस व यूपीए सरकार इशरत जहां मुठभेड़ मामले में नरेंद्र मोदी की घेराबंदी कर रही थी, उस वक्त अजीत डोभाल इशरत जहां केस में सबसे बड़े पैरोकार बने। उन्होंने इशरत जहां को लश्कर ए तैयबा का सदस्य बताकर घेराबंदी के राजनीतिक मोटिव पर सवाल उठाया। लालकृष्ण आडवाणी, गोविंदाचार्य, गुरुमूर्ति से लेकर संघ व भाजपा से जुड़े तमाम वरिष्ठ नेता व विचारक फाउंडेशन के विमर्श कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं।
 इन पर भी एक नज़र
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन को विवेकानंद केंद्र के नाम पर जमीन कांग्रेस के शासन काल में नरसिम्हा राव सरकार के दौरान मिली। भैरों सिंह शेखावत ने उपराष्ट्रपति के तौर पर 22 फरवरी 2004 को इस भवन का शिलान्यास किया था। दिसंबर 2009 में भवन का उद्घाटन माता अमृतानंद मयी और न्यायमूर्ति एमएन वैंकटचलैया ने किया था। फाउंडेशन के रिपोर्ट के मुताबिक आय का बड़ा स्रोत दान से प्राप्त राशि है। देश और विदेश से लोग इस संस्थान को अनुदान देते हैं। वर्ष 2013 में फाउंडेशन को एक करोड़ 49 लाख 56 हजार रुपये डोनेशन के तौर पर मिले। 2 लाख रुपए विदेश मंत्रालय से अनुदान में मिला। इसी साल मानदेय और वेतन पर 93 लाख 36 हजार से ज्यादा की राशि खर्च कर दी।

Friday, 17 July 2015

उफा में संयुक्‍त बयान ऐतिहासिक सफलता नहीं बल्कि ‘ऐतिहासिक चूक’ : कांग्रेस

 नई दिल्ली : पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन समेत अन्य घटनाक्रमों पर चिंता जताते हुए कांग्रेस ने रूस के उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान को ‘ऐतिहासिक चूक’ करार दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर के बाद घटनाक्रमों का होना, सहमति के संबंध में भारत द्वारा किये गये दावे के विपरीत पाकिस्तान के एनएसए का बयान और अब नियंत्रण रेखा पर बिना उकसावे के गोलीबारी की घटनाओं से इस बात की पुष्टि होती है कि सरकार और भाजपा ने जिसे ऐतिहासिक सफलता करार दिया था, वह ऐतिहासिक भूल थी। घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के अलावा मोदी को मुंबई आतंकवादी हमलों के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाने के भारत के मामले में ‘समझौता करने और उसे हल्का करने’ के लिए माफी मांगनी चाहिए।
शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने सलाहकारों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने उनसे यह कूटनीतिक अनर्थ कराया जिससे भारत को बड़ी परेशानी उठानी पड़ी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता की नीति असंगत और लापरवाही वाली रही है। इसमें भारत की सैद्धांतिक चिंताओं पर ध्यान देने वाली गंभीर साझेदारी का खाका कभी नहीं रहा। कांग्रेस की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब अत्यधिक तनाव के बीच भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि बिना उकसावे के गोलीबारी करने और सीमापार आतंकवाद पर पुरजोर और प्रभावी जवाब दिया जाएगा। भारत ने जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान द्वारा लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन करने के बाद यह कड़ा संदेश दिया है। पाकिस्तान की ओर से पिछले दो दिन में भारतीय क्षेत्रों में मोर्टार दागे गये हैं। भारत ने भी ऐसा ही जवाब दिया और दोनों पक्षों ने अपनी अपनी तरफ के लोगों के हताहत होने की बात कही है।